Ten Commandments(3)

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7 thoughts on “Ten Commandments(3)”

  1. आज का वचन हमे यह सिखाता है कि हमे अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ नहीं लेना है नहीं तो हमारे पाप क्षमा नहीं होंगे, और हमे परमेश्वर का भय मानना है, और सत्य पर चलना है, और झूठी गवाही नहीं देनी है, और अगर हमने गलत काम किया है तो प्रार्थना करते समय हमे पश्चाताप करना है। और हमे परमेश्वर की महिमा करनी है तब हमारा परमेश्वर हमारे सब प्रश्नों का उत्तर देता है। आमीन

  2. यह आज्ञा हमें सिखाती है कि परमेश्वर का नाम पवित्र है और उसका उपयोग केवल सम्मान, प्रार्थना और सच्चाई के लिए होना चाहिए। परमेश्वर के नाम का दुरुपयोग करना, झूठी शपथ लेना या गलत कामों में उसका नाम लेना गंभीर पाप है। परमेश्वर ऐसे व्यक्ति को निर्दोष नहीं ठहराता, बल्कि उसे दोषी मानता है। इसलिए हर विश्वासी को अपने शब्दों और जीवन में परमेश्वर के नाम का आदर करना चाहिए। आमीन

  3. Anjali chauhan

    आप सभी को जय मसीह की
    इस संदेश से हमें यह शिक्षा मिलती है कि परमेश्वर का नाम बहुत पवित्र और महान है। हमें कभी भी परमेश्वर के नाम को व्यर्थ, मजाक या गलत तरीके से नहीं लेना चाहिए। परमेश्वर ने हमें जीवन दिया है, इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम उनके नाम का आदर करें और अपने जीवन में उनकी महिमा करें। जब हम परमेश्वर के नाम का सम्मान करते हैं, तो यह दिखाता है कि हमारे हृदय में उनके लिए सच्चा प्रेम और विश्वास है। हमें अपने बोलचाल, व्यवहार और जीवन में हमेशा सावधान रहना चाहिए ताकि हमारे द्वारा परमेश्वर का नाम महिमा पाए। यह संदेश हमें याद दिलाता है कि हमें परमेश्वर के प्रति श्रद्धा, आदर और आज्ञाकारिता के साथ जीवन जीना चाहिए। 🙏

  4. Sabhi ko Jai masih ki iss vachan se maine sikha ki hame prabhu pramashwar ka adar karna chahiye or hame parmeshwar ke nam ko vart nahi laina chahiye or parmeshwar adar ham karange to pita parmeshwar bhi hamara adar karange AMEN

  5. Sameeksha Singh 198

    Praise the lord🙏🏻♥️

    This message is tells us about 3rd commandment of God.
    Exodus 20:7
    Says,
    You shall not take the name of the Lord your God in vain, for the Lord will not leave him unpunished who takes His name in vain.

    It says;
    You shall not take the name of the Lord your God in vain.
    To take God’s name in vain is to not use the name of the holy God correctly but misusing it in an ungodly manner.
    About the things that God controls and when He intervenes or intercedes, we should be very careful not to judge or speak rudely with our fleshly thoughts.
    We have to follow God’s will and should never judge his commandments.

    Amen

  6. आज के संदेश से हम सीख रहे हैं प परमेश्वर के नाम का उपयोग करने की कोशिश पूरी तरह से अलग है नीति बच्चन 3 ,, 6 कहता है परमेश्वर को स्मरण करना सभी बातो में वही तेरे मार्ग को सीधा करेगा जब हम इस बात को परमेश्वर के आगे रखते हैं तो हमें परमेश्वर के वचन आजा का पालन करना है हमें परमेश्वर के लिए जीना है परमेश्वर हमारी ख्याल रखते हैं इससे हम समझ पाते हैं हम अपने कर को सत्य में करते हैं यदि आप हृदय से सम्मान करते है तो परमेश्वर का नाम व्यर्थ नहीं लेंगे आज के संदेश से समझ पाए

  7. Sunita Seth

    दस आज्ञा का यह संदेश मुझे यह समझ आया कि हमे परमेश्वर का आदर और सम्मान करना चाहिए 1सैमुअल 2.का 30 पद कहता हैं अगर कोई मेरा आदर करता है तो मैं भी उनका आदर करूंगा जो मेरा निरादर करेगा वे हल्के में समझे जाएंगे हमे परमेश्वर प्रभु के नाम को व्यर्थ नहीं लेना चाहिए हमे परमेश्वर का भय मानना चाहिए और हृदय में सतर्क रहते हुए प्रार्थना करना चाहिए और त्रियक परमेश्वर के महिमा के लिए जीवन जीना चाहिए