Many people think patience means “holding back anger.”
If they do not express anger outwardly, they believe they are being patient.
But the patience that God sees is different.
You may smile on the outside,
but if there is still anger and discomfort inside,
that is not true patience.
That is only hiding.
God does not look at the outside,
but at the condition of the heart.
True patience
is not suppressing anger,
but allowing the heart to be changed into love.
Jesus was criticized, misunderstood, and opposed by many people.
Yet He never avoided them.
Instead, He loved and forgave them to the end.
This is true patience.
Sometimes,
we want to avoid difficult people
and escape from painful situations.
But in those very relationships,
our hearts are revealed, and we discover them.
And through those relationships, our faith grows.
Patience is not simply waiting.
Patience is enduring with love.
And through that process, our spirit grows.
Also, patience is not doing nothing while waiting.
It is like planting a tree and waiting for fruit.
You must plant the seed, water it, remove weeds,
and protect it from harm.
Only then can it bear fruit.
The same is true for answers and blessings.
We must pray, live by the Word, guard our hearts,
and continue to plant and cultivate.
Then, in God’s time,
we will surely see the fruit.
A person whose inside and outside are the same,
a person who does not lose love in any situation,
that is the person God calls complete.
Today,
do not try to hide your anger.
Pray that your heart will be transformed into love.
And continue to plant and cultivate for your answer.
That is true patience




Jai masih ki sabhi ko…pita parmeshwar sabhi ko changayi aasis or shanti dherya jeevan me sabko de…pita hmare andhruni hirdya ko dekhte h bahari khushi ko nhi…
जय मसीह की आप सभी को 👏
आजतक मैं यही सोचता था की धैर्य का अर्थ होता हैं बाहरी क्रोध न करना, इस वचन को पढ़ने के बाद आज मुझे समझ आया कि मैं गलत था।
हमें क्रोध को छिपाना नहीं है बल्कि इसे प्रभु प्रेम मैं परिवर्तित करना हैं, अपने हृदय को सीचना है और इसमें प्रेम को उगाना हैं।
आमीन।
सच्ची धैर्यता सच में हमें प्रभु के हृदय के समान बनाती है। हमारे प्रभु ने कभी भी दूसरों की आलोचना या बुराई नहीं की। जिन्होंने उन्हें सताया, उनके साथ भी प्रभु प्रेम और भलाई करते रहे। क्रूस पर भी यीशु मसीह ने कहा — ‘हे पिता, इन्हें क्षमा कर।’ अंत तक प्रभु ने धैर्य धारण किया और समस्त मानव जाति को बचाने के लिए अपने आप को बलिदान कर दिया
जय मसीह की 🙏🏻
आज के संदेश से मैंने सीखा कि सच्ची धैर्यशीलता को छिपाना नहीं, बल्कि जीवन में परिवर्तन लाना है।
हम अक्सर सोचते हैं कि हमारे अंदर कोई पाप नहीं है और हम बहुत धैर्यशील हैं, क्योंकि हम गुस्सा नहीं करते।
लेकिन हमें यह समझने की ज़रूरत है कि भले ही हम बाहर से गुस्सा न करें, अगर हमारे हृदय में गुस्सा भरा हुआ है, तो वह सच्ची धैर्यशीलता नहीं है।
हम कहते हैं कि हम धैर्यशील हैं, लेकिन यह कैसी धैर्यशीलता है, जब हमारे हृदय में न धैर्य है और न ही शांति?
परमेश्वर हमारे हृदय को जानता है। वह जानता है कि हमारे भीतर क्या है—धैर्य है या अशांति।
यदि हमारे हृदय में धैर्य और शांति नहीं है, तो हम परमेश्वर को सच्चे मन से कैसे अर्पण कर पाएंगे?
इसलिए हमें प्रार्थना के द्वारा अपने हृदय में धैर्य को विकसित करना है और सच्ची धैर्यशीलता के बीज बोने हैं।
Praise the Lord 🙏🏻
Today through this message I have learnt that what is the true patience….
We think that if we are not showing anger so our nature is not aggressive and we are so patient, but there is one thing if we are not showing anger but still in our hearts there is anger then we cannot say we are patient. It is called hiding means we are hiding our anger, jealousy n more.
Becoz, if the second person is not able to see our anger but God sees everything and he knows everything and he doesn’t accept our outstanding quality but he accepts our inward qualities.
Therefore we donot need to hide those things instead we need to rid out those things from our hearts by praying, keeping word of God, Giving proper tithes and keeping Sabbath holy then we can change it.
Amen
आज का संदेश से हम समझ पाए परमेश्वर का धन्यवाद हो हमें गुस्सा नहीं करना चाहिए परमेश्वर हमारी बाहर का जो भी दिखावा है उसे पर ध्यान नहीं देते हैं लेकिन अंदर के हर एक भाव को परमेश्वर देखते हैं जब हमारे यीशु का आलोचना की विरोध लोग की तो भी शांति से सही और उसकी वजह सबको प्रेम से क्षमा की यही सच्ची शांति है धर्म हमें प्रेम के साथ सहन करना सिखाती है हमें प्रार्थना करना चाहिए बच्चन के अनुसार जीवन जीना चाहिए अपने हृदय की रक्षा करनी चाहिए हमें अपने गुस्से कोछुपाने की कोशिश नहीं करना चाहिए अपने हृदय प्रेम में परिवर्तित करना चाहिए यही सच्चा धर्म है जय मसीह पास्टर जी आज के संदेश से इतना समझ पाए
आप सभी को जय मसीह की आज के वचन से हमने यह सीखा है कि हमें गुस्सा को हृदय से निकाल कर फेंकना है यह नहीं कि हम बारिक मन से हंसे और अंदर से गुस्सा करें जी स तरह हमारा प्रभु ने लोगों ने आलोचना की ।लोगों ने यीशु की आलोचना की, उन्हें गलत समझा और उनका विरोध किया।फिर भी उन्होंने कभी उनसे परहेज नहीं किया।इसके बजाय, उन्होंने अंत तक उनसे प्रेम किया और उन्हें क्षमाकिया।यही सच्ची धैर्य की निशानी है। उसे तरह हमें भी क्रोध को दूर करना और अंत तक धीरज धरना पर प्रार्थना करना है आमीन धन्यवाद पिता परमेश्वर को करती हूं
जय मसीह की आप सभी को 🙏🏻
आज का वचन हमे सिखाता है कि हमे धैर्य रखना है। धैर्य का अर्थ होता है – अपने हृदय को प्रेम में बदलना। जैसे कि – जब कोई हम पर गुस्सा करता है तो हम उसे कुछ नहीं कहते, मनुष्य की नज़र में ये धैर्य होता है। परंतु परमेश्वर की नज़र में धैर्य का अर्थ है कि अगर हम पर कोई क्रोधित हो तो हम उससे प्रेम से बर्ताव करे।
हमे अपने गुस्से को छिपाना नहीं है , हमे पिता परमेश्वर से प्रार्थना करना है कि वे हमारे हृदय को प्रेम में परिवर्तित कर दे। आमीन ✨🙏🏻
सभीको जय मसिह कि 🙏
हमे गुस्से को क्रोध को काबू मे रखना हैं क्योकी परमेश्वर बाहर रुपसे नही बल्की हमारे व्रदय को देखता हैं!
पर हम क्या करते हैं प्रतीक्षा करते हैं हमे प्रतीक्षा नही करणा हैं
येशूने सभी लोगोसे प्रेम किया और अंत तक जो लोग उसका विरोध करते थे उनकेलीये प्राथना कि वैसेही हमे प्राथना करणी हैं
दुसरोको समझणा हैं येही सच्चा धैर्य हैं हमे भी धीरज धरणा हैं अंत तक येशूसे प्रेम करणा हैं
और लोगोसे प्रेम करणा अपना विश्वास बडाणा हैं येही सच्चा धीरज हैं आमेन ❤️
आज का वचन हमें सिखाता है कि धैर्य का अर्थ – प्रतीक्षा करना नहीं है बल्कि, प्रेम के साथ सहन करना है। हमें प्रार्थना करनी चाहिए, वचन के अनुसार जीना चाहिए, और हृदय की रक्षा करनी चाहिए। फिर, परमेश्वर हमें इसका फल अवश्य देगा। हमें ऐसा व्यक्ति बनना है जिसके भीतर और बाहर एकरूपता हो। हमें गुस्से को छिपाने की कोशिश नहीं करनी बल्कि, प्रार्थना करना है कि हमारा हृदय प्रेम में परिवर्तित हो जाए। आमीन✨🙏🏻
जय मसीह की सिस्टर जी आज के संदेश से हमने यह सीखा है कि हमें जब भी क्रोध आए तब हमें क्रोध को छुपाना नहीं चाहिए हमें क्रोध को प्रेम में परिवर्तित करना चाहिए हमें अपने मन में धैर्य रखना चाहिए जैसे कई लोगों ने यीशु की आलोचना की, उन्हें गलत समझा और उनका विरोध किया।फिर भी उन्होंने कभी उनसे परहेज नहीं किया।इसके बजाय, उन्होंने अंत तक उनसे प्रेम किया जैसे परमेश्वर हमसे से प्रेम करते हैं और सबको क्षमा करते हैं वैसे ही हमें सबसे प्रेम करना चाहिए और किसी पर गुस्सा नहीं करना चाहिए हमें हमेशा धैर्य रखना चाहिए धैर्य का मतलब प्रतीक्षा करना नहीं है इसका मतलब है कि पेड़ लगाकर फल का इंतजार करना हमें गुस्सा नहीं करना चाहिए और सबसे प्रेम करना चाहिए आमीन सब कुछ है मसीह की