THE BEATITUDES (9) – The Merciful (1)

The Merciful (1)

  1. Mercy is similar to kindness of the nine fruits of the Holy Spirit
  1. Categories in the Mercy

 1) The mercy of forgiveness

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13 thoughts on “THE BEATITUDES (9) – The Merciful (1)”

  1. Neha sharma

    Pita sach me apka hirdya prem se bhara hua h usme daya prem chama h.dusro par hme kaise daya krni chahiye ye sikha h or kaise anushasit Krna h…hme apne hirdya se sb prakar ki burayi ko dur krne me madd kijiye pita..mai bhi or manmin ke sabhi viswasi bhai behn wo sbhi apke vachan ko apne hirdya me rkhne paye prabhu ishu masih ke naam se mai prathna krti hu amennn

  2. Jai masih ki ,hum is vachan se जानने paye h ki haa abhi bhi mujhme gussa की वजह से दया की भी कमी है कि क्यों हमारे साथ बार बार कोई ऐसा ही व्यवहार कर रहा है जबकि मैं गलत भी नहीं हूँ इस वजह से हम उनसे नफरत करने लग गये ,उनसे दूरी बनाने लग गए ,पर प्रभु की कही गई बात याद रही कि जैसे हम बार बार प्रार्थना में अपने गुनाहो की छमा मांगते h waise hi hume bhi agle insan ke hridy ko samjhte huwe unki Bhawna ko samjhte huwe उनके पाप को छमा कर हमें अपने रिश्ते में फिर से आगे प्रेम के साथ बढ़ना चाहिए फिर उनका व्यवहां चाहे जैसा भी रहे ,लेकिन हद से ज्यादा कोई परेशान करे तो इसके लिए हमें प्रार्थना करना चाहिए और उस व्यक्ति को परमेश्वर के हाथ में दे देना चाहिए ,उनके साथ हम रहना चाहिए नही रहना चाहिए ये सब परमेश्वर अपने सही समय पर तय कर लेंगे ,लेकिन हम खुद से ये सब न करे,, परमेश्वर अपने सभी बच्चों से प्रेम करते है वो सब कुछ अपने बच्चों को पहले से ही दे चुके है लेकिन हमने जो अपने और परमेश्वर के बीच पाप की दीवार बनाई है उसके वजह से वो आशीष हम तक नहीं a रही h इसलिए हमे लगातार पश्चाताप करते रहना है जिससे कि पाप की दीवार ढह जाए और वो सारी आशीष हम तक आने पाए

  3. Praise the lord everyone the Jesus love me because I am the son of Jesus Christ and hi is my father so the whoever loves the lord also take his name for remember him AMEN❤️

  4. जब हम लोगों के प्रति दया करे बिना झगड़ा किया अगर वो कोई गलत काम ही क्यों न करे पर जब दया करे दूसरों पे तो प्रभु हमारे ऊपर भी दया करेगा पर इस संसार में लोग दूसरों पे दया न करके उनके ऊपर प्रहार भी करते है पर हमारा प्रभु इस संसार में आए तो हमे दया का शब्द समझे एक समय था जब मैं भी दूसरों के गलती को न छुपा के उसपर उसका न्याय की और लड़ाई करती थी जिसका परिणाम हमेशा उल्टा होता था पर प्रभु मिली तो हमारी आंख खुली और अपने को जांची तो बहुत दुःख हुआ कि मेरे ह्रदय में को दया नहीं है फ़िर प्रभु यीशु के सामने मै अपने हृदय में दया तो पवित्र आत्मा के मदद से अब मै आसानी से दूसरों के प्रति दया की जैसे हमारे प्रभु सभी से प्रेम दया की तब हमारा हृदय बदल गया धन्यवाद पिता परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह 🙏🏻

  5. Kusmita Lal singh

    Aj ke sandesh se humne sikha h ki bakai hume dusron par daya karni chihiye vachan ke anusaar sath ka sattar bar shama karna chihiye apne hirdhaya ko sudh karna chihiye apne bhai ke prati prem hona chihiye kyunki humare pita parmeshwar ne bi sulgti hui batti ko nhi bhujaya na hi use kuchla balki use prem kia aur use gale lagya

  6. आज हम संदेश को जानेंगे दया प्रभु का हृदय हमें सिखाता है जैसे हम बच्चन को समझते हैं परमेश्वर जब हमें डांटे हैं ताड़ना देते हैं इसलिए कि हम पिता के वचन को अच्छे से पालन कर सके इस तरह जब हम किसी के प्रति नफरत गुस्सा रखे रहेंगे तो परमेश्वर हमारी प्रार्थना का उत्तर नहीं देते हैं हमें किसी का आलोचना नहीं करना चाहिए जब हम किसी के कोई भी गलती पाप करते हुए देखें उनके लिए बच्चन के द्वारा बताएं प्रार्थना करें उन्हें भी पिता संभाले जैसे हम अपने बच्चों को समझे यदि सही मार्ग पर ना आए तब हम बच्चों को डांटे हैं बोलते हैं इस तरह हमारा पिता परमेश्वर हमारे हर अच्छाई का ध्यान रखते हैं हमारे बच्चे हमारे बताएं मार्ग पर चले

  7. आज के संदेश से में सीख पाई हूं ! की जिन्होंने मेरे साथ कुछ भी बुरा किया है उन्हें मैं दिल से क्षमा करूंगी ! जिससे कि मेरा प्रभु भी मेरे अपराधों को क्षमा करेगा ! और जब हम किसी समस्या में या परेशानियों में होते है तो इसका यह मतलब नहीं है कि प्रभु हमसे प्रेम नहीं करते बल्कि इसका यह मतलब है ! कि प्रभु हमसे बहुत ज्यादा प्रेम करते हैं !अगर हमसे कोई गलती या पाप होता है तो ! परमेश्वर हमारी ताड़ना करते हैं ! और चाहते हैं कि हम उसकी सच्ची संतान बने इसलिए हमें सच्चे हृदय से परमेश्वर के वचनों को सुनना है और उनके अनुसार जीवन जीना है !🙏🏻🙏🏻

  8. Sameeksha Singh 198

    Hey! I am here writing my experience, today through this (QT) Quit time I examined myself. Today I realised that there is lack of mercy inside me. I found out that sometimes when someone does something wrong that time I’m not able to forgive that person. Everyday, I pray God forgive our debts as we forgive our debtors, but today I realised until I forgive those who have wronged me, God will not forgive me either. Therefore, first I have to forgive those who sin against me. Thank u Lord for this message……🌷

    Amen

  9. Sheetal singh 165

    जय मसीह की।
    आज के संदेश से मैंने यह सीखा कि हमें दया दिखानी चाहिए। हम प्रार्थना में कहते हैं, “हे पिता, जैसे हमने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर।” लेकिन क्या हम केवल मुख से ही यह कहते हैं? हमें केवल प्रार्थना में ही नहीं, बल्कि अपने हृदय से भी दूसरों को क्षमा करना चाहिए।
    जब हम दूसरों को क्षमा करेंगे, तभी परमेश्वर भी हमारे पापों को क्षमा करेगा। हमें अपने प्रभु यीशु मसीह के समान दयालु बनना है। यदि कोई हमसे गलती करता है, तो हमें उसकी गलती को बार-बार याद नहीं दिलाना चाहिए, बल्कि उसके प्रति प्रेम, दया और क्षमा का व्यवहार करना चाहिए।
    आमीन।

  10. आज के वचन से हमने यह सीखा है कि अनुशासन की दया घृणा या निंदा से नहीं, बल्कि प्रेम से की जाती है। इब्रानियों 12:6 कहता है, “क्योंकि प्रभु जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है, और जिसे पुत्र बना लेता है, उसे कोड भी मारता है जी स तरह हम अपने बच्चों से बहुत ज्यादा प्रेम करते हैं उनकी गलतियां को बार-बार हम क्षमा करते हैं इस तरह हमें दूसरे की गलतियां को भी क्षमा करना चाहिए जी स तरह हमारा प्रभु ने हमारे पाप को क्षमा ने यह दृष्टान्त दिया, और मत्ती 18:35 में निर्णायक रूप से कहा, “यदि तुम में से हर एक अपने भाई को मन से क्षमा न करेगा, तो मेरा स्वर्गीय पिता भी तुम्हारे साथ ऐसा ही करेगा।” यदि हम अपने भाइयों को हृदय से क्षमा नहीं करेंगे, तो वह भी हमें क्षमा नहीं करेइसलिए आपको कोई जवाब नहीं मिल सकता। हम सभी पापी थे जिन्हें नरक की आग में गिरना पड़ा। लेकिन हमें केवल यीशु मसीह के क्रूस के द्वारा ही धर्मी ठहराया गया। तो फिरजब हम पाप करते हैं तो पिता परमेश्वर से कोई उत्तर नहीं मिलता हमारे और परमेश्वर के बीच में पाप का दीवार खड़ी है जब हम प्रभु यीशु को उधर धार करता के रूप में ग्रहण करते हैं अपने पापा का पश्चाताप करते हैं तब पिता परमेश्वर हमारे प्रार्थना को उत्तर देते हैं धन्यवाद पिता परमेश्वर को करती हूं

  11. आज के वचन से हमने यह सीखा है कि अनुशासन की दया घृणा या निंदा से नहीं, बल्कि प्रेम से की जाती है। इब्रानियों 12:6 कहता है, “क्योंकि प्रभु जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है, और जिसे पुत्र बना लेता है, उसे कोड भी मारता है जी स तरह हम अपने बच्चों से बहुत ज्यादा प्रेम करते हैं उनकी गलतियां को बार-बार हम क्षमा करते हैं इस तरह हमें दूसरे की गलतियां को भी क्षमा करना चाहिए जी स तरह हमारा प्रभु ने हमारे पाप को क्षमा ने यह दृष्टान्त दिया, और मत्ती 18:35 में निर्णायक रूप से कहा, “यदि तुम में से हर एक अपने भाई को मन से क्षमा न करेगा, तो मेरा स्वर्गीय पिता भी तुम्हारे साथ ऐसा ही करेगा।” यदि हम अपने भाइयों को हृदय से क्षमा नहीं करेंगे, तो वह भी हमें क्षमा नहीं करेइसलिए आपको कोई जवाब नहीं मिल सकता। हम सभी पापी थे जिन्हें नरक की आग में गिरना पड़ा। लेकिन हमें केवल यीशु मसीह के क्रूस के द्वारा ही धर्मी ठहराया गया। तो फिरजब हम पाप करते हैं तो पिता परमेश्वर से कोई उत्तर नहीं मिलता हमारे और परमेश्वर के बीच में पाप का दीवार खड़ी है जब हम प्रभु यीशु को उधर धार करता के रूप में ग्रहण करते हैं अपने पापा का पश्चाताप करते हैं तब पिता परमेश्वर हमारे प्रार्थना को उत्तर देते हैं धन्यवाद पिता परमेश्वर को करती हूं

  12. पूजा गौतम

    जय मसीह आज के वचन के द्वारा हमने यही सीखा परमेश्वर इतना महान दयालु और दुनिया का मलिक होकर भी हम पापियों से इतना प्यार किया और हमें क्षमा किया और हम पर दया किया वैसे हमें भी सबसे प्रेम करना है और परमेश्वर के वचन में बने रहना है उनसे प्रार्थना करना है की परमेश्वर हमें दया की आत्मा दें क्षमा की आत्मा दें यदि हम दूसरों को क्षमा करें और उनसे प्रेम करें उन पर दया करें परमेश्वर भी हमें क्षमा करेगा और हम पर दया करेगा और हमसे प्रेम करेगा और जैसे की बच्चे कुछ गलतियां करते हैं तो हम उन्हें डांटे हैं हमें उनसे उतना प्रेम भी करना चाहिए ताकि उनके अंदर कोई ऐसी भावना ना आए जो हमसे और परमेश्वर से दूर कर सके आमीन धन्यवाद पास्टर जी इतनी गहराई से वचन को देने के लिए